वोल्वो लोडर APS स्विच: ऑपरेटर के लिए फुल गाइड
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अगर आप वोल्वो लोडर (Vol चलाते हैं, त आपने केबिन में APS (Automatic Power Shift) और 1–4 गियर स्विच जरूर देखा होगा। कई ऑपरेटर्स इस बात को लेकर उलझन में रहते हैं कि इनका सही इस्तेमाल कैसे करें।
इस गाइड में हम जानेंगे कि APS सिस्टम क्या है, इसके अलग-अलग मोड्स (L, M, H, AUT) कैसे काम करते हैं, और इनका सही तालमेल बिठाकर आप डीजल की बचत और मशीन की परफॉर्मेंस को कैसे बढ़ा सकते हैं।1. APS (ऑटोमैटिक पावर शिफ्ट) क्या है?
APS का मतलब है ऑटोमैटिक पावर शिफ्ट । यह सिस्टम लोडर के गियर को ऑटोमैटिकली कंट्रोल करता है ताकि: फ्यूल की बचत हो और ड्राइविंग स्मूद रहे। इंजन पर ओवरलोड न पड़े।ऑपरेटर को मशीन पर बेहतर कंट्रोल मिले और थकान कम हो।आपके लोडर के APS डायल पर मुख्य रूप से L, M, H, AUT मोड्स और साथ में 1–4 गियर लिमिट स्विच होता है। आइए इन्हें विस्तार से समझते हैं।
2. L, M, H मोड्स का सही इस्तेमाल
ये तीनों मोड्स गियर बदलने की संवेदनशीलता (Shifting Sensitivity) और इंजन के RPM को कंट्रोल करते हैं।> Engine RPM: इंजन कितनी तेजी से घूम रहा है।
> Machine Speed: मशीन के चलने की रफ्तार।
> Gear Shifting: गियर का बदलना।
> L Mode (Low Mode) – हल्का काम और ईंधन की बचत
जब आप APS स्विच को “L” पर रखते हैं, तो मशीन कम इंजन RPM और कम स्पीड पर ही अगला गियर लगा देती है। यह कैसे काम करता है? मान लीजिए लोडर 1st गियर में चल रहा है। “L” मोड में इंजन कम RPM पर ही तुरंत 2nd गियर में शिफ्ट हो जाएगा। इससे मशीन आराम से और बिना झटका लिए स्मूद पावर देती है।
कब इस्तेमाल करें: हल्का काम करते समय, खाली बकेट के साथ मूवमेंट करने पर, फिसलन वाली या सॉफ्ट जमीन पर। फायदे: डीजल का खर्च सबसे कम होता है, इंजन पर लोड नहीं पड़ता, गियर शिफ्टिंग बहुत स्मूद होती है और टायर स्लिप होने का खतरा कम रहता है।
M Mode (Medium Mode) – बैलेंस्ड पावर और बेस्ट माइलेज
जब आप स्विच को “M”पर रखते हैं, तो मशीन गियर बदलने से पहले इंजन को थोड़ा ज्यादा RPM तक जाने देती है। यह सबसे ज्यादा इस्तेमाल होने वाला मोड है।यह कैसे काम करता है?“L” मोड की तुलना में इसमें इंजन थोड़ा ज्यादा RPM लेगा और फिर 2nd गियर में शिफ्ट होगा, जिससे मशीन को बेहतर पुलिंग पावर (खींचने की ताकत) मिलती है।
कब इस्तेमाल करें: रोजाना के सामान्य काम, रेत (Sand) की लोडिंग और मिक्स वर्किंग कंडीशन में।
फायदे: पावर और फ्यूल का बेहतरीन संतुलन मिलता है। गियर शिफ्टिंग बिल्कुल नेचुरल महसूस होती है और मशीन बिना बेवजह हाई RPM लिए बढ़िया प्रोडक्टिविटी देती है। ज्यादातर ऑपरेटर्स के लिए यह सबसे बेस्ट मोड है।
H Mode (High Mode) – भारी काम और मैक्सिमम पावर
जब मशीन को भारी काम के लिए पूरी ताकत की जरूरत होती है, तब “H”मोड का इस्तेमाल किया जाता है।
यह कैसे काम करता है? इस मोड में गियर बहुत देर से (हाई RPM पर) शिफ्ट होता है ताकि हर गियर में मशीन को पूरी ताकत मिल सके। कब इस्तेमाल करें:भारी खुदाई (Heavy Digging), कड़क मिट्टी या पत्थर लोड करते समय, चढ़ाई पर काम करते हुए, या खाली बकेट के साथ लंबी दूरी तय करते समय।
फायदे: मैक्सिमम पुलिंग पावर मिलती है और भारी लोड में भी इंजन दबा हुआ महसूस नहीं होता। (नोट: इसमें फ्यूल थोड़ा ज्यादा खर्च होता है)।
एक्सेलेरेटर (Race Pedal) का सीक्रेट नियम
APS मोड्स (L, M, H) का असली फर्क तब दिखाई देता है जब आप एक्सेलेरेटर पैडल को हल्का या मीडियम दबाते हैं। लेकिन याद रखें:अगर आप हर समय पूरा एक्सेलेरेटर (Full Race) दबाकर रखेंगे, तो मशीन चाहे L मोड पर हो या M मोड पर, वह H मोड (High Performance) की तरह ही बर्ताव करेगी। ऐसा इसलिए क्योंकि फुल पैडल दबाने का मतलब है कि ऑपरेटर को तुरंत पूरी पावर चाहिए, और तब गियरबॉक्स जल्दी गियर नहीं बदलेगा बल्कि हाई RPM पर जाकर ही शिफ्टिंग करेगा।
3. AUT (ऑटोमैटिक) मोड क्या है?
AUT का मतलब है फुल ऑटोमैटिक मोड। इसमें मशीन खुद तय करती है कि लोड और RPM के हिसाब से कौन सा गियर सबसे सही रहेगा।
फायदे: ड्राइविंग बेहद आसान हो जाती है और साइट की परिस्थिति के हिसाब से स्वतः फ्यूल की बचत होती है।
सबसे अच्छा किसके लिए:नए ऑपरेटर्स के लिए, नॉर्मल लोडिंग के लिए और ऐसी साइट्स के लिए जहाँ काम लगातार बदलता रहता है।
4. मैनुअल मोड क्या है?
जब आप APS को बंद करके खुद मैन्युअली गियर चुनते हैं, तो वह मैनुअल मोड कहलाता है।
कब इस्तेमाल करें: बेहद मुश्किल इलाके, फिसलन वाली मिट्टी, भारी पत्थरों की लोडिंग या खड़ी चढ़ाई पर।
फायदे: ऑपरेटर को टॉर्क पर पूरा कंट्रोल मिलता है।
नुकसान: अगर गलत गियर में मशीन चलाई गई तो फ्यूल ज्यादा खर्च होगा और ट्रांसमिशन का घिसाव (Wear and Tear) बढ़ जाएगा।
5. गियर 1–4 स्विच का क्या काम है?
कई ऑपरेटर्स सोचते हैं कि APS चालू होने पर 1-4 गियर स्विच बंद हो जाता है, जबकि ऐसा नहीं है। यह स्विच ट्रांसमिशन की मैक्सिमम गियर लिमिट सेट करता है। यानी आपकी मशीन अधिकतम किस गियर तक ऑटोमैटिकली जाएगी, यह यही स्विच तय करता है।
गियर 1: भारी खुदाई, कीचड़, चढ़ाई और भारी लोड धकेलने के लिए। (हाई टॉर्क, कम स्पीड)
गियर 2: नॉर्मल लोडिंग, बजरी/रेत लोडिंग और कम दूरी की मूवमेंट के लिए। (सबसे आम इस्तेमाल)
गियर 3: मीडियम ट्रैवलिंग, लाइट लोडिंग और ओपन साइट मूवमेंट के लिए। (ज्यादा स्पीड, कम टॉर्क)
गियर 4: लंबी दूरी की ट्रैवलिंग और खाली बाल्टी के साथ हाईवे या साइट रोड पर चलने के लिए। (मैक्सिमम स्पीड)
APS और 1–4 गियर स्विच का तालमेल (उदाहरण से समझें)
APS मोड मशीन का शिफ्टिंग बिहेवियर (स्टाइल) तय करता है, और 1-4 स्विच गियर की लिमिट तय करता है। दोनों मिलकर काम करते हैं:
1. APS = L, गियर स्विच = 2: मशीन हैवी पावर मोड में रहेगी लेकिन गियर 2 से ऊपर नहीं जाएगी। (बेस्ट फॉर: हार्ड लोडिंग/मिट्टी का काम)
2. APS = M, गियर स्विच = 3: मशीन बैलेंस्ड मोड में चलेगी और अधिकतम गियर 3 तक जाएगी। (बेस्ट फॉर: नॉर्मल वर्किंग)
3. APS = H, गियर स्विच = 4: मशीन बहुत तेजी से शिफ्ट करेगी और टॉप स्पीड (गियर 4) तक जाएगी। (बेस्ट फॉर: रोड ट्रैवलिंग)
6. अलग-अलग सिचुएशन के लिए बेस्ट सेटिंग्स
सिचुएशन (Work Conditions)
7. सबसे आम गलतियाँ और फ्यूल सेविंग टिप्स
ऑपरेटर द्वारा की जाने वाली गलतियाँ:
H मोड + गियर 4 में खुदाई करना: इससे लोडर को पूरी पावर नहीं मिलती, टायर स्लिप होता है और डीजल की भारी बर्बादी होती है।
फुल स्पीड में बकेट फिल करना: बकेट भरते समय हमेशा स्पीड कम और टॉर्क ज्यादा होना चाहिए।
लगातार किक-डाउन (Kick-Down) का इस्तेमाल: इससे ट्रांसमिशन और इंजन पर अनावश्यक लोड पड़ता है।
डीजल बचाने के एक्सपर्ट टिप्स:
नॉर्मल लोडिंग के समय हमेशा M मोड का इस्तेमाल करें।
लंबी दूरी तय करते (ट्रैवलिंग) समय H मोड + गियर 4 का उपयोग करें, इससे समय और फ्यूल दोनों बचते हैं।
बकेट भरते समय मशीन को L मोड + गियर 1 या 2 पर रखें, इससे टायर स्लिप नहीं होंगे और बकेट आसानी से भरेगी।
नए ऑपरेटर्स को हमेशा AUT मोड से शुरुआत करनी चाहिए।
निष्कर्ष (Conclusion)
वोल्वो लोडर का APS सिस्टम केवल आराम के लिए नहीं, बल्कि मशीन की उम्र बढ़ाने और डीजल का खर्च घटाने के लिए दिया गया है। सही समय पर सही मोड और गियर लिमिट का चुनाव करके आप एक एक्सपर्ट ऑपरेटर बन सकते हैं। अपनी साइट के हिसाब से आज ही इन सेटिंग्स को ट्राई करें!



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